सुन्दर काण्ड दोहा (29)
दो० – "प्रीति सहित सब भेटे रघुपति करुना पुंज। पूँछी कुसल नाथ अब कुसल देखि पद कंज।।" भावार्थ सभी वानर प्रेमपूर्वक प्रभु श्रीराम से मिले। श्रीराम करुणा के सागर हैं। प्रभु ने सबकी कुशलता पूछी और कहा कि अब तो उनकी कुशलता इसीलिए है कि उन्होंने रामजी के चरण-कमल का दर्शन पा लिया। विस्तृत विवेचन 1. प्रेम और मिलन का दृश्य – हनुमान जी लंका से सीता जी का समाचार लेकर लौटे। उन्होंने प्रभु को पूरी कथा सुनाई। तब अंगद, जाम्बवान, सुग्रीव आदि सब प्रभु श्रीराम से प्रेमपूर्वक मिले। यह मिलन केवल शारीरिक नहीं, बल्कि भावनात्मक था। भक्त और भगवान का आपसी प्रेम यहाँ प्रकट होता है। 2. राम का करुणामय स्वभाव – श्रीराम ‘करुना पुंज’ हैं। वे हर प्राणी के दुख-दर्द को अपना मानते हैं। इसलिए उन्होंने सबसे पहले वानरों की कुशलता पूछी। भगवान का यह स्वभाव है कि वे स्वयं दुख में भी हों, पर दूसरों की कुशलता पूछना नहीं भूलते। 3. सीता का समाचार और प्रभु की कुशलता – प्रभु के लिए अपनी कुशलता का अर्थ केवल यही था कि माता सीता का समाचार मिला। जब भक्त, भगवान या उनके प्रियजन सुरक्षित होते हैं, तभी प्रभु अपनी कुशलता मानते ह...