सुन्दर काण्ड चौपाई (231-238)
सुन्दर काण्ड चौपाई 231-238 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:
चौपाई
देह बिसाल परम हरुआई। मंदिर तें मंदिर चढ़ धाई।।
जरइ नगर भा लोग बिहाला। झपट लपट बहु कोटि कराला।।
तात मातु हा सुनिअ पुकारा। एहि अवसर को हमहि उबारा।।
हम जो कहा यह कपि नहिं होई। बानर रूप धरें सुर कोई।।
साधु अवग्या कर फलु ऐसा। जरइ नगर अनाथ कर जैसा।।
जारा नगरु निमिष एक माहीं। एक बिभीषन कर गृह नाहीं।।
ता कर दूत अनल जेहिं सिरिजा। जरा न सो तेहि कारन गिरिजा।।
उलटि पलटि लंका सब जारी। कूदि परा पुनि सिंधु मझारी।।
भावार्थ
हनुमानजी लंका में अपनी विशाल देह बनाए अग्नि लगाते हैं। मंदिर से मंदिर, घर से घर आग फैल जाती है। देखते-ही-देखते पूरी लंका जलकर खाक हो जाती है और लोग हाहाकार करने लगते हैं। तभी सब पुकारते हैं – “हे तात! हे माता! हमें बचाओ।”
लोगों को लगता है कि यह साधारण वानर नहीं, कोई देवता है जो वानर का रूप धरकर आया है।
साधुओं की अवज्ञा (विभीषण जैसे सज्जन की अवहेलना) का यही फल है कि नगर जलकर अनाथ जैसा हो गया। पूरे नगर को हनुमानजी ने जलाया, परंतु विभीषण के घर को छोड़ दिया।
भगवान शिव ने भी पार्वतीजी से कहा था कि यह अग्नि वैसे तो सबको जलाती है, पर विभीषण के कारण उसका घर नहीं जल पाया।
इस प्रकार हनुमानजी ने पूरी लंका जला दी और फिर समुद्र में कूदकर वापस लौटे।
विस्तृत विवेचन
1. हनुमान की शक्ति और वीरता
जब रावण की सेना ने उनका अपमान कर पूँछ में आग लगाई, तो उसी को हनुमानजी ने लंका दहन का साधन बना दिया।
यह इस बात का प्रतीक है कि भक्त किसी भी विपत्ति को अवसर में बदल देता है।
2. लंका दहन का आध्यात्मिक अर्थ
लंका दहन केवल भौतिक नगर जलाना नहीं है, यह अधर्म और अहंकार के अंत का प्रतीक है।
जब मन में रावण जैसे दोष (काम, क्रोध, लोभ, अहंकार) जलते हैं, तभी विभीषण जैसे सत्पुरुष का घर (धर्म, भक्ति, विनम्रता) सुरक्षित रहता है।
3. साधु का सम्मान
तुलसीदासजी बताते हैं कि साधु और सज्जन की अवज्ञा करने से नगर या परिवार अनाथ हो जाता है।
विभीषण ने रामजी की शरण ली थी, इसलिए उनका घर अग्नि से भी सुरक्षित रहा।
4. दैवीय संकेत
लंका दहन से देवताओं को विश्वास हुआ कि अब रावण का अंत निश्चित है।
हनुमानजी के पराक्रम से यह सिद्ध हुआ कि भगवान राम के दूत को कोई रोक नहीं सकता।
👉 सारांश :
हनुमानजी ने लंका दहन कर यह दिखाया कि अधर्म का अंत निश्चित है, और धर्मात्मा विभीषण जैसे भक्त सदैव सुरक्षित रहते हैं।
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