सुन्दर काण्ड चौपाई (186-194)
सुन्दर काण्ड चौपाई 186-194 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:
कह लंकेस कवन तैं कीसा। केहिं के बल घालेहि बन खीसा।।
की धौं श्रवन सुनेहि नहिं मोही। देखउँ अति असंक सठ तोही।।
मारे निसिचर केहिं अपराधा। कहु सठ तोहि न प्रान कइ बाधा।।
सुन रावन ब्रह्मांड निकाया। पाइ जासु बल बिरचित माया।।
जाकें बल बिरंचि हरि ईसा। पालत सृजत हरत दससीसा।
जा बल सीस धरत सहसानन। अंडकोस समेत गिरि कानन।।
धरइ जो बिबिध देह सुरत्राता। तुम्ह ते सठन्ह सिखावनु दाता।
हर कोदंड कठिन जेहि भंजा। तेहि समेत नृप दल मद गंजा।।
खर दूषन त्रिसिरा अरु बाली। बधे सकल अतुलित बलसाली।।
ये चौपाई सुंदरकाण्ड में उस समय की है जब रावण हनुमान जी को पकड़कर अपने दरबार में लाता है और उनसे उनके पराक्रम के बारे में सवाल करता है।
भावार्थ
रावण हनुमान से पूछता है — "अरे वानर! तू कौन है? किसके बल से लंका में आकर मेरा बाग उजाड़ दिया? क्या तूने मेरा नाम और कीर्ति नहीं सुनी? किस अपराध से तूने राक्षसों को मारा? बतला, क्यों न मैं अभी तेरा प्राण ले लूँ?"
हनुमान उत्तर देते हुए कहते हैं — "हे रावण! जिस प्रभु (श्रीराम) के बल से यह सम्पूर्ण ब्रह्मांड बना और जिसकी माया से सृष्टि रची गई है, उसी के बल से मैंने यह सब किया है। उसी के बल से ब्रह्मा, विष्णु और महादेव सृष्टि को पालते, रचते और संहार करते हैं। वही भगवान, जिनके धनुष को तोड़कर, राजा जनक की सभा में, उन्होंने दंभित राजाओं को पराजित किया, और जिनके बल से खर-दूषण, त्रिशिरा और बाली जैसे बलशाली राक्षस मारे गए — उन्हीं के आदेश पर मैं आया हूँ।"
विस्तृत विवेचन
1. रावण का अहंकार और प्रश्न
रावण हनुमान को "कीसा" (छोटा, तुच्छ वानर) कहकर तिरस्कार करता है।
वह पूछता है कि किसके बल से तुमने उसकी लंका में घुसकर बाग उजाड़ा और राक्षसों को मारा।
यह रावण के अहंकार को दर्शाता है कि वह स्वयं को अजेय मानता है और भगवान के भक्त की शक्ति को नहीं पहचानता।
2. हनुमान का उत्तर — प्रभु का बल
हनुमान जी सीधे-सीधे बताते हैं कि यह सब उनके अपने बल से नहीं, बल्कि श्रीराम के बल से हुआ है।
वे बताते हैं कि श्रीराम का बल ही वह कारण है जिससे सृष्टि के रचयिता (ब्रह्मा), पालनकर्ता (विष्णु) और संहारकर्ता (शिव) कार्य करते हैं।
यह स्पष्ट करता है कि भक्त के हर कार्य में ईश्वर का ही सामर्थ्य होता है, न कि उसका निजी अहंकार।
3. राम बल के उदाहरण
श्रीराम ने शिव का धनुष भंग किया और जनकपुरी के स्वयंबर में सभी राजाओं को पराजित किया।
खर-दूषण, त्रिशिरा और बाली जैसे महाबली राक्षस उनके हाथों मारे गए।
इन उदाहरणों से हनुमान यह साबित करते हैं कि जिस राम के सेवक वे हैं, उसका बल असीम और अजेय है।
4. भक्ति का संदेश
भक्त कभी अपने पराक्रम का श्रेय खुद को नहीं देता; वह सब कुछ ईश्वर की शक्ति और कृपा को मानता है।
अहंकारी रावण जैसे लोगों को यह समझाना भी ईश्वर का कार्य है, और भक्त इसे निभाता है।
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