सुन्दर काण्ड चौपाई (152- 160 )
सुन्दर काण्ड चौपाई 152-160 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:
चौपाई:
मन संतोष सुनत कपि बानी। भगति प्रताप तेज बल सानी।।
आसिष दीन्हि रामप्रिय जाना। होहु तात बल सील निधाना।।
अजर अमर गुननिधि सुत होहू। करहुँ बहुत रघुनायक छोहू।।
करहुँ कृपा प्रभु अस सुनि काना। निर्भर प्रेम मगन हनुमाना।।
बार बार नाएसि पद सीसा। बोला बचन जोरि कर कीसा।।
अब कृतकृत्य भयउँ मैं माता। आसिष तव अमोघ बिख्याता।।
सुनहु मातु मोहि अतिसय भूखा। लागि देखि सुंदर फल रूखा।।
सुनु सुत करहिं बिपिन रखवारी। परम सुभट रजनीचर भारी।।
तिन्ह कर भय माता मोहि नाहीं। जौं तुम्ह सुख मानहु मन माहीं।।
शाब्दिक भावार्थ:
मन संतोष...बानी – जब कपि (हनुमान) की विनम्र वाणी सीता माता ने सुनी, तो उनका मन संतोष से भर गया।
भगति प्रताप...सानी – हनुमान की भक्ति, तेज, बल और प्रभाव से वे प्रभावित हुईं।
आसिष दीन्हि...जाना – उन्होंने हनुमान को राम का प्रिय जानकर आशीर्वाद दिया कि तुम बल, शील (विनम्रता) के भंडार बनो।
अजर अमर...होहू – तुम अजर (नित्य) और अमर रहो, गुणों के भंडार बनो, और रामजी की अत्यधिक कृपा पाओ।
करहुँ कृपा...काना – सीता की ये बात हनुमान के कानों में पड़ी तो वे प्रेम में मग्न हो गए।
बार बार...सीसा – बार-बार चरणों में सिर झुकाया और हाथ जोड़कर बोले –
अब कृतकृत्य...माता – अब मैं कृतार्थ (धन्य) हो गया माँ! तुम्हारा आशीर्वाद अमोघ (अचूक) माना जाता है।
सुनहु मातु...रूखा – हे माता! मुझे बहुत भूख लगी है और मुझे सुंदर फल दिख रहे हैं।
सुनु सुत...भारी – माता कहती हैं – हे पुत्र! वन की रक्षा राक्षस करते हैं जो बहुत शक्तिशाली हैं।
तिन्ह कर भय...माहीं – पर हनुमान कहते हैं – माता! मुझे उनका भय नहीं है, यदि इससे तुम्हें सुख मिलता है तो मैं फल खाऊँगा।
भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:
यह अंश हनुमान जी और सीता माता के भावनात्मक संवाद को दर्शाता है। जब हनुमान माता सीता से मिलते हैं और उन्हें राम का संदेश देते हैं, तो उनकी भक्ति, विनम्रता और सेवा-भावना से सीता माता अत्यंत प्रसन्न होती हैं।
1. सीता जी का आशीर्वाद:
हनुमान की भक्ति और गुणों से प्रभावित होकर माता सीता उन्हें आशीर्वाद देती हैं कि वे अजर-अमर रहें, बल, शील और भक्ति के प्रतीक बनें। यह आशीर्वाद हनुमान के लिए महान उपलब्धि है।
2. हनुमान जी का प्रेममग्न होना:
जैसे ही वे आशीर्वाद सुनते हैं, उनका हृदय प्रेम से भर उठता है। वे बार-बार चरणों में सिर झुकाते हैं और कहते हैं कि अब उनका जीवन सफल हो गया।
3. हनुमान की भूख और विनम्रता:
फिर वे निवेदन करते हैं कि उन्हें भूख लगी है और सुंदर फल दिख रहे हैं। लेकिन बिना आज्ञा के वे कुछ नहीं करना चाहते – यह उनकी मर्यादा और विनम्रता दर्शाता है।
4. राक्षसों का भय नहीं:
सीता माता कहती हैं कि वन की रक्षा राक्षस करते हैं, लेकिन हनुमान निडर होकर कहते हैं कि उन्हें किसी का भय नहीं यदि इससे माता को थोड़ी सी प्रसन्नता मिले।
निष्कर्ष:
इस चौपाई में हनुमान जी की भक्ति, सेवा-भावना, विनम्रता, और निडरता का अद्भुत चित्रण है। साथ ही, सीता माता की ममता, करुणा और आशीर्वाद की महिमा भी झलकती है। यह प्रसंग हनुमान को अजर-अमर बनाने वाले आशीर्वाद का मूल आधार है और भक्त-भगवती के बीच प्रेमपूर्ण संबंध की सुंदर मिसाल है।
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