सुन्दर काण्ड चौपाई (239-246)

 सुन्दर काण्ड चौपाई 239-246 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:

 चौपाई:

मातु मोहि दीजे कछु चीन्हा। जैसें रघुनायक मोहि दीन्हा।।

चूड़ामनि उतारि तब दयऊ। हरष समेत पवनसुत लयऊ।।

कहेहु तात अस मोर प्रनामा। सब प्रकार प्रभु पूरनकामा।।

दीन दयाल बिरिदु संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी।।

तात सक्रसुत कथा सुनाएहु। बान प्रताप प्रभुहि समुझाएहु।।

मास दिवस महुँ नाथु न आवा। तौ पुनि मोहि जिअत नहिं पावा।।

कहु कपि केहि बिधि राखौं प्राना। तुम्हहू तात कहत अब जाना।

तोहि देखि सीतलि भइ छाती। पुनि मो कहुँ सोइ दिनु सो राती।।

यह चौपाई सुन्दरकाण्ड में आती है, जब हनुमानजी माता सीता से मिलते हैं और उनका संदेश लेकर लौटने की अनुमति माँगते हैं।

🌸 भावार्थ

1. सीता जी का चिन्ह देना

सीता जी हनुमान से कहती हैं – "बेटा! जैसे श्रीराम ने तुम्हें अपनी अंगूठी दी थी, वैसे ही मैं भी राम को पहचान कराने के लिए कोई चिन्ह तुम्हें देती हूँ।"

यह कहकर उन्होंने अपने सिर से चूड़ामणि उतारकर हनुमान को दे दी।

2. राम को संदेश

सीता जी ने कहा – "बेटा! प्रभु श्रीराम को मेरा प्रणाम कहना और कहना कि वे सब प्रकार से पूर्णकाम हैं। हे दीनबंधु! अपने नाम के अनुरूप मेरी भारी विपत्ति को दूर कीजिए।"

3. रावण की बात सुनाना

सीता जी आगे कहती हैं – "बेटा! रावण (सकरसु्त) की बातें भी प्रभु को बताना और यह भी कहना कि रामबाण के सामर्थ्य को वह पहचान ले।"

4. एक माह की अवधि

सीता जी कहती हैं – "नाथ (रामजी) यदि एक मास के भीतर न आए तो समझ लें कि मैं जीवित न रह सकूँगी।"

5. प्राणों की कठिनाई

सीता जी कहती हैं – "बेटा! बताओ, मैं अपने प्राण किस प्रकार रखूँ? अब तुमसे कहकर ही मैंने अपने मन की व्यथा प्रकट की।"

6. हनुमान को देखकर संतोष

सीता जी कहती हैं – "तुम्हें देखकर मेरे हृदय को बड़ी शांति मिली है। अब तो मेरे लिए दिन और रात एक जैसे हो गए हैं (अर्थात राम के आने की प्रतीक्षा में समय बहुत भारी हो गया है)।"


🪔 विस्तृत विवेचन

इस प्रसंग में तीन मुख्य भाव प्रकट होते हैं –

1. श्रद्धा और विश्वास –

सीता जी ने हनुमान को अपना पुत्र मानकर उनसे श्रीराम तक संदेश पहुँचाने की प्रार्थना की। उन्होंने जो चूड़ामणि दी, वह केवल आभूषण नहीं था, बल्कि प्रेम और विश्वास का प्रतीक था।

2. विरह और धैर्य –

सीता जी का हृदय राम-विरह में अत्यंत व्याकुल था। वे कहती हैं कि "यदि एक मास के भीतर राम न आए तो मैं प्राण नहीं रख पाऊँगी।" इससे उनके असह्य दुख और विरह का पता चलता है।

3. आशा और सांत्वना –

हनुमान का दर्शन पाकर सीता जी को संतोष मिला। उन्हें लगा कि अब राम को सब हाल पता चलेगा और वे शीघ्र ही आकर उन्हें दुःख से उबारेंगे।

👉 निष्कर्षतः, इस चौपाई में माता सीता का विरह-वेदना, श्रीराम पर अटल विश्वास, और हनुमान के प्रति मातृत्व भाव बड़ी सुंदरता से व्यक्त हुआ है।

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