सुन्दर काण्ड चौपाई (205-212)

 सुन्दर काण्ड चौपाई 205-212 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:

चौपाई

राम चरन पंकज उर धरहू। लंका अचल राज तुम्ह करहू।।

रिषि पुलिस्त जसु बिमल मंयका। तेहि ससि महुँ जनि होहु कलंका।।

राम नाम बिनु गिरा न सोहा। देखु बिचारि त्यागि मद मोहा।।

बसन हीन नहिं सोह सुरारी। सब भूषण भूषित बर नारी।।

राम बिमुख संपति प्रभुताई। जाइ रही पाई बिनु पाई।।

सजल मूल जिन्ह सरितन्ह नाहीं। बरषि गए पुनि तबहिं सुखाहीं।।

सुनु दसकंठ कहउँ पन रोपी। बिमुख राम त्राता नहिं कोपी।।

संकर सहस बिष्नु अज तोही। सकहिं न राखि राम कर द्रोही।।

चौपाई सुन्दरकाण्ड में हनुमानजी ने रावण को नीति और धर्म का उपदेश दिया है। अब हम इसका भावार्थ और विवेचन करते हैं—

भावार्थ

हे रावण! यदि तुम अपने हृदय में श्रीराम के चरण-कमल धारण कर लो तो लंका का राज्य सदा अचल और अखंड रहेगा। तुम्हारे पूर्वज ऋषि पुलस्त्य का निर्मल यश चन्द्रमा की तरह है, उसमें तुम कलंक न लगाओ।

राम-नाम के बिना वाणी शोभा नहीं देती, जैसे वस्त्र रहित स्त्री आभूषण पहनकर भी नहीं सुहाती। राम से विमुख होकर संपत्ति और राज्य की प्रभुता टिकती नहीं, जैसे बिना जड़ वाले वृक्ष वर्षा पाकर भी शीघ्र सूख जाते हैं।

हे दशानन! सुनो, मैं प्रतिज्ञा करके कहता हूँ—राम से विमुख हुए व्यक्ति का कोई भी उद्धारक नहीं होता। हजारों शंकर, विष्णु और ब्रह्मा भी रामद्रोही की रक्षा नहीं कर सकते।

विस्तृत विवेचन

1. रामभक्ति की महत्ता –

हनुमानजी रावण को समझाते हैं कि यदि तुम राम के चरणों को स्वीकार कर लो, तो तुम्हारी लंका और राज्य स्थिर रहेंगे। क्योंकि भगवान से विमुख होकर कोई भी सुख-संपत्ति टिकती नहीं।

2. पूर्वजों का यश –

पुलस्त्य ऋषि (रावण के पूर्वज) का यश निर्मल है, उसे रावण अपने अधर्म और दुराचार से कलंकित न करे। यह संदेश है कि कुल की मर्यादा बनाए रखना हर व्यक्ति का कर्तव्य है।

3. राम-नाम की शोभा –

हनुमानजी कहते हैं कि राम-नाम के बिना वाणी अर्थहीन है। जैसे वस्त्रविहीन स्त्री आभूषण पहनकर भी नहीं सुशोभित होती। यह उपमा बताती है कि जीवन में यदि भगवान का नाम और भक्ति न हो तो सारी विद्या, वैभव और कला व्यर्थ हो जाते हैं।

4. संपत्ति का क्षणभंगुर स्वरूप –

राम से विमुख होकर अर्जित संपत्ति और प्रभुत्व स्थायी नहीं रहते। जैसे बिना मूल वाले वृक्ष वर्षा पाकर थोड़ी देर हरे हो जाते हैं परन्तु शीघ्र सूख जाते हैं।

5. रामद्रोही का परिणाम –

हनुमानजी दृढ़ वचन में कहते हैं कि जो राम का द्रोही है, उसे संसार का कोई देवता—चाहे सहस्र शिव, विष्णु या ब्रह्मा ही क्यों न हों—बचा नहीं सकता। यह स्पष्ट करता है कि भगवान राम ही परम उद्धारक हैं, उनसे विरोध करने वाले का नाश निश्चित है।

👉 सार – इस चौपाई में हनुमानजी ने रावण को स्पष्ट संदेश दिया कि राम के चरणों का आश्रय ही सम्पत्ति, यश और राज्य को स्थायित्व दे सकता है। राम से विमुख होने पर सारी शोभा

, वैभव और शक्ति क्षणिक है।


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