सुन्दर काण्ड दोहा (28)
सुन्दर काण्ड दोहा 28 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:
दोहा
दो० – जाइ पुकारे ते सब बन उजार जुबराज।
सुनि सुग्रीव हरष कपि करि आए प्रभु काज।।28।।
यह प्रसंग उस समय का है जब हनुमान जी सीता माता का पता लगाकर वापस अपनी बानर सेना के पास वापस पहुंचे।
भावार्थ:
जब बानर सेना ने हनुमान जी को देखा और उन्हें पता चला कि सीता माता का पता चल गया, तो वे खुशी। में बगीचे को उजाड़ने और फल खाने लगे और रखवाले को भी मारकर भगा दिया। तब रखवाले महाराज सुग्रीव को इसकी सूचना दी। परंतु सुग्रीव को इस बात की खुशी हुई बालों ने भगवान राम का कार्य अर्थात सीता माता का पता लगा लिया है।
आध्यात्मिक संकेत
वानर सेना हमारे मन के विकारों और वृत्तियों का प्रतीक है। जब प्रभु की पुकार होती है तो सारी शक्ति उसी दिशा में लग जाती है।
सुग्रीव का प्रसन्न होना यह दर्शाता है कि जब जीवन प्रभु-सेवा में लग जाता है, तो मन (सुग्रीव) भी आनंदित हो उठता है।
निष्कर्ष:
जब व्यक्ति खुश होता है तो कुछ ऐसे कार्य भी करने लगता है, जो अनुकूल नहीं है । बानर सेना की खुशी और रखवाले के कहने के बावजूद सुग्रीव का प्रसन्न होना इस बात का संकेत है।
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