सुन्दर काण्ड दोहा(60)
सुन्दर काण्ड दोहा 60 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:
दोहा —
सकल सुमंगल दायक रघुनायक गुन गान।
सादर सुनहिं ते तरहिं भव सिंधु बिना जलजान।। 60।।
भावार्थ :
जो लोग श्रद्धा और भक्ति भाव से श्रीरामजी के गुणों का गान सुनते हैं, वे बिना किसी साधन (नाव) के ही इस संसार रूपी भयंकर समुद्र को पार कर जाते हैं। अर्थात्, भगवान श्रीराम के गुणों का श्रवण और कीर्तन ही मुक्ति का सरल मार्ग है।
विस्तृत विवेचन :
इस दोहे में गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्रीराम के नाम और गुणों की महिमा का वर्णन किया है।
1. “सकल सुमंगल दायक” का अर्थ है — श्रीरामजी के गुणों का गान हर प्रकार के शुभ फल देने वाला है। यह जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मोक्ष सब कुछ प्रदान करता है।
2. “सादर सुनहिं” — जो व्यक्ति आदर और श्रद्धा के साथ भगवान के चरित्रों और गुणों को सुनता है, वह सांसारिक दुखों से मुक्त हो जाता है।
3. “तरहिं भव सिंधु बिना जलजान” — जैसे कोई समुद्र पार करने के लिए नाव का सहारा लेता है, वैसे ही भक्त श्रीराम के गुणों को सुनकर और स्मरण कर बिना किसी बाहरी साधन के ही संसार-सागर को पार कर लेता है।
शिक्षा :
भगवान श्रीराम के चरित्र और गुणों का आदरपूर्वक श्रवण जीवन को पवित्र करता है और मनुष्य को जन्म-मरण के बंधन से मुक्त कर देता है। सच्ची भक्ति ही जीवन का परम साधन है।
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