सुन्दर काण्ड (चौपाई 15-16)

 सुन्दर काण्ड चौपाई 15-16 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:

कबनेहुँ जतन देइ नहिं जाना।

ग्रससि न मोहि कहेउ हनुमाना।।

जोजन भरि तेहिं बदनु पसारा।

कपि तनु कीन्ह दुगुन बिस्तारा।।

भावार्थ

हनुमान जी कहते हैं कि माता (सुरसा ) आप कोई भी प्रयास कर लीजिए, परंतु आप मुझे अपना भोजन नहीं बना पाएंगी। हनुमान जी का शरीर (कपि तनु) सुरसा के शरीर की तुलना में दुगुना बड़ा हो गया है, सुरसा माता ने जब अपना शरीर पूरे जोजन भर (एक जोजन लगभग 8-9 मील होता है) का शरीर का विस्तार कर लिया अर्थात फैला लिया तब हनुमान जी ने अपना शरीर दोगुना फैला दिया।

विस्तृत विवेचन

"कबनेहुँ जतन देइ नहिं जाना"

यहां हनुमान जी की विनम्रता प्रकट होती है जो सुरसा माता को किसी प्रकार का नुक़सान नहीं पहुंचाना चाहते हैं, इसीलिए उन्होंने सुरसा माता को नुक़सान पहुंचाने के जगह अपने शरीर का विस्तार करना हीं उचित समझा।

"ग्रससि न मोहि कहेउ हनुमाना"

'ग्रससि' का अर्थ है निगलना या खा जाना। हनुमान स्वयं कह रहे हैं कि सुरसा उन्हें कभी भी निगल नहीं पाएंगे। यह उनके विशाल और शक्तिशाली रूप को दर्शाता है। साथ ही यह भी बताता है कि सुरसा माता को नुक़सान पहुंचाने के जगह

 वे अपने शरीर का विस्तार करना हीं उचित समझते हैं।

"जोजन भरि तेहिं बदनु पसारा"

यहाँ हनुमान अपने शरीर को  सुरसा माता जिन्होने अपना शरीर जोजन भर फैला लिया उससे दोगुना कर लिया। जोजन एक दूरी की माप है, लगभग 8-9 मील के बराबर होता है उससे दोगुना फैला लिया। यह उनकी अद्भुत शक्ति और विराट रूप का वर्णन है। जब सुरसा माता उन्हें खाना चाहती थी, तो उन्होंने अपना शरीर एक जोजन से दोगुना तक फैला लिया।

"कपि तनु कीन्ह दुगुन बिस्तारा"

'कपि तनु' यानी वानर का शरीर, जो पहले से ही बड़ा था, उसने दुगुना विस्तार कर लिया। यह हनुमान की दिव्य शक्ति और उनकी वीरता का प्रतीक है। 

समग्र अर्थ

यह चौपाई हनुमान के विराट रूप, उनकी भक्ति, और राम के प्रति उनके सम्मान को दर्शाती है। यह बताती है कि हनुमान अपनी शक्ति का उपयोग केवल धर्म और भक्ति के लिए करते हैं, न कि किसी को नुकसान पहुँचाने के लिए। उनका विशाल शरीर और शक्ति उनके अद्भुत साहस और समर्पण का परिचायक है।

निष्कर्ष

यह चौपाई हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति में विनम्रता, सम्मान और शक्ति का संयोजन होता है। हनुमान जी के विराट रूप के माध्यम से यह भी बताया गया है कि जब भक्ति और शक्ति साथ हों, तो कोई भी बाधा दूर की जा सकती है। साथ ही, यह हमें यह भी स्मरण कराता है कि शक्ति का सही उपयोग सदैव धर्म और न्याय के लिए होना चाहिए।

Comments

Popular posts from this blog

सुन्दर काण्ड चौपाई ( 33-40)

सुन्दर काण्ड चौपाई (195-204)