सुन्दर काण्ड दोहा (55)
सुन्दर काण्ड दोहा 55 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:
दोहा
सहज सूर कपि भालु सब पुनि सिर पर प्रभु राम।
रावन काल कोटि कहु जीति सकहिं संग्राम।।55।।
💬 भावार्थ
इस दोहा में गुप्तचर रावण को राम की सेना के बारे में बता रहे हैं
वानर और भालू सब स्वभाव से ही वीर हैं। ऊपर से उनके सिर पर भगवान श्रीराम का आशीर्वाद और संरक्षण भी है। फिर सोचो — ऐसे में यदि रावण जैसे लाखों काल (मृत्यु समान बलशाली) शत्रु भी सामने आएं, तो भी वे युद्ध में उन्हें जीत सकते हैं।
🕉️ विस्तृत विवेचन
इस दोहे मे रावण के गुप्तचर रामसेना की अजेय शक्ति का वर्णन किया है—
1. सहज वीरता – वानर और भालू जाति के प्राणी स्वभाव से ही उत्साही, बलवान और पराक्रमी हैं। युद्ध उनका स्वभाव है।
2. रामकृपा का प्रभाव – जब भगवान श्रीराम का कृपाश्रय उनके सिर पर है, तो उनकी शक्ति अनंत हो जाती है। भगवान की कृपा से वे किसी भी बलशाली शत्रु को जीत सकते हैं।
3. रावण की तुलना काल से की है - गुप्तचर कहते हैं कि यदि रावण जैसे असंख्य काल समान शत्रु भी सामने हों, तब भी रामभक्तों की विजय निश्चित है।
👉 इस प्रकार यह दोहा भक्ति और दिव्य शक्ति के मेल का अद्भुत चित्र प्रस्तुत करता है — जहां भक्त का साहस और प्रभु की कृपा मिलकर अजेयता का रूप ले लेते हैं।
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