सुन्दर काण्ड दोहा (52)

 सुन्दर काण्ड दोहा 52 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:

दोहा –

कहेहु मुखागर मूढ़ सन मम सन्देसु उदार।

सीता देइ मिलेहु न त आवा काल तुम्हार।। 

शब्दार्थ –

मुखागर – मुँह से कहा हुआ, स्पष्ट रूप से बोला हुआ।

मूढ़ सन – मूर्ख (यहाँ रावण से)।

सन्देसु उदार – उदार (दयालु) सन्देश।

देइ – देकर।

मिलेहु – मिलना, मिलो।

आवा काल तुम्हार – तुम्हारा अन्त समय आ पहुँचा है।

भावार्थ –

 लक्ष्मण जी ने रावण के गुप्तचरों को पत्र लिखकर दिया और कहा कि रावण से जाकर कह दो कि वह सीता जी को सम्मानपूर्वक लौटा दे। यदि वह ऐसा नहीं करता, तो समझ लेना कि अब उसका अन्त काल निकट आ गया है।

विस्तृत विवेचन –

इस दोहे में लक्ष्मण की असीम करुणा और धर्मनिष्ठा प्रकट होती है।

वे रावण जैसे पापी को भी बिना युद्ध के सुधारने का अवसर दे रहे हैं। लक्ष्मण जी द्वारा यह संदेश “उदार सन्देश” है, क्योंकि यह क्षमा और नीति दोनों का संगम है।

यदि रावण सीता जी को लौटा देता है तो विनाश से बच सकता है, परंतु यदि अहंकार में अड़ा रहेगा, तो उसका नाश निश्चित है।

यहाँ “आवा काल तुम्हार” यह भविष्यवाणी रूपी वाक्य झलकता है कि रावण का अंत निकट है।

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