सुन्दर काण्ड चौपाई (345-352)
सुन्दर काण्ड चौपाई 345-352 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:
चौपाई:
प्रगट बखानहिं राम सुभाऊ। अति सप्रेम गा बिसरि दुराऊ।।
रिपु के दूत कपिन्ह तब जाने। सकल बाँधि कपीस पहिं आने।।
कह सुग्रीव सुनहु सब बानर। अंग भंग करि पठवहु निसिचर।।
सुनि सुग्रीव बचन कपि धाए। बाँधि कटक चहु पास फिराए।।
बहु प्रकार मारन कपि लागे। दीन पुकारत तदपि न त्यागे।।
जो हमार हर नासा काना। तेहि कोसलाधीस कै आना।।
सुनि लछिमन सब निकट बोलाए। दया लागि हँसि तुरत छोडाए।।
रावन कर दीजहु यह पाती। लछिमन बचन बाचु कुलघाती।।
भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:
रावण के गुप्तचरों नें राम और विभीषण के प्रसंग को देखकर राम की सराहना करने में अपना भेद भूल गया और सभी बानर यह जानकर उसे बांध दिया। सुग्रीव ने उसे अंग भोगकर भेजने का आदेश दिया। सभी बानर उसे मारने लगे। तब लक्ष्मण जी उन्हें दयापूर्वक छुड़ा दिया। उन्होंने उस दूत पत्र दिया और रावण को दिखाने के लिए कहा।
फिर लक्ष्मणजी ने कहा — "रावण को यह पाती (संदेश) दे देना कि वह कुलघाती है, श्रीराम से वैर न करे।"
सारांश:
यह दिखाता है कि राम की शरण में जाने पर वे बड़े से बड़े शत्रु को भी माफ कर देते हैं।
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