सुन्दर काण्ड चौपाई (340-347)

 सुन्दर काण्ड चौपाई 340-347 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:

चौपाई

तात राम नहिं नर भूपाला। भुवनेस्वर कालहु कर काला।।

ब्रह्म अनामय अज भगवंता। ब्यापक अजित अनादि अनंता।।

गो द्विज धेनु देव हितकारी। कृपासिंधु मानुष तनुधारी।।

जन रंजन भंजन खल ब्राता। बेद धर्म रच्छक सुनु भ्राता।।

ताहि बयरु तजि नाइअ माथा। प्रनतारति भंजन रघुनाथा।।

देहु नाथ प्रभु कहुँ बैदेही। भजहु राम बिनु हेतु सनेही।।

सरन गएँ प्रभु ताहु न त्यागा। बिस्व द्रोह कृत अघ जेहि लागा।।

जासु नाम त्रय ताप नसावन। सोइ प्रभु प्रगट समुझु जियँ रावन।।

भावार्थ

हे भाई रावण! श्रीराम कोई साधारण नर-राजा नहीं हैं। वे समस्त लोकों के स्वामी हैं और काल के भी काल हैं। वे अजन्मा, अनश्वर, अनादि, अनंत, सर्वव्यापक और अजेय ब्रह्मस्वरूप परमात्मा हैं। वे गो, ब्राह्मण, देवता और धरती की रक्षा के लिए करुणा-सागर होकर मानव रूप में अवतीर्ण हुए हैं। वे सज्जनों के आनंददाता और दुष्टों के संहारक हैं।

वेद और धर्म की रक्षा के लिए ही वे प्रकट हुए हैं। इसलिए हे भ्राता! उनके विरोध को छोड़कर उनके चरणों में सिर नवाओ। वे शरणागत का कभी त्याग नहीं करते। उनके नाम मात्र से त्रिविध ताप (दैहिक, दैविक और भौतिक) मिट जाते हैं। वही प्रभु तुम्हारे सम्मुख प्रकट हुए हैं, इसे हृदय से समझो और माता सीता को उन्हें लौटा दो।

विस्तृत विवेचन

1. राम का स्वरूप – विभीषण स्पष्ट करते हैं कि राम कोई सामान्य मनुष्य या अयोध्या के राजा नहीं हैं। वे काल से भी बलवान, अजन्मा और सर्वव्यापक ब्रह्म हैं। यहाँ "कालहु कर काला" का अर्थ है कि वे मृत्यु और समय को भी नियंत्रित करते हैं।

2. अवतार का उद्देश्य – राम ने मानव तन धारण कर गो, ब्राह्मण, गौ और धर्म की रक्षा हेतु अवतार लिया है। उनका कार्य है सज्जनों का पालन और असुरों का संहार।

3. शरणागत वत्सलता – प्रभु राम का यह विशेष गुण है कि वे कभी भी शरणागत का त्याग नहीं करते, चाहे वह कितना ही दोषी क्यों न हो। विभीषण संकेत करते हैं कि यदि रावण भी अब शरण में आ जाए तो वे उसे भी क्षमा कर देंगे।

4. राम नाम की महिमा – "जासु नाम त्रय ताप नसावन" – राम नाम मात्र से ही तीनों प्रकार के दुख नष्ट हो जाते हैं। जिस नाम की इतनी महिमा है, उस नामी का प्रत्यक्ष स्वरूप प्रभु रघुनाथ इस समय प्रकट हैं।

5. रावण के लिए शिक्षा – विभीषण का उद्देश्य है कि रावण अपने हठ और अहंकार को त्यागकर प्रभु के शरणागत हो जाए और माता सीता को लौटा दे। यही उसके कल्याण का एकमात्र मार्ग है।

👉 इस प्रकार, यह चौपाई राम के परमात्मा स्वरूप, उनकी करुणा, शरणागत वत्सलता और धर्मरक्षा के संकल्प को प्रकट करती है। साथ ही रावण को चेतावनी भी देती है कि प्रभु से बैर करके कोई जीवित नहीं रह सकता।

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