सुन्दर काण्ड चौपाई (313-322)

 सुन्दर काण्ड चौपाई 313-322 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:

चौपाई:

उहाँ निसाचर रहहिं ससंका। जब ते जारि गयउ कपि लंका।।

निज निज गृहँ सब करहिं बिचारा। नहिं निसिचर कुल केर उबारा।।

जासु दूत बल बरनि न जाई। तेहि आएँ पुर कवन भलाई।।

दूतन्हि सन सुनि पुरजन बानी। मंदोदरी अधिक अकुलानी।।

रहसि जोरि कर पति पग लागी। बोली बचन नीति रस पागी।।

कंत करष हरि सन परिहरहू। मोर कहा अति हित हियँ धरहु।।

समुझत जासु दूत कइ करनी। स्त्रवहीं गर्भ रजनीचर धरनी।।

तासु नारि निज सचिव बोलाई। पठवहु कंत जो चहहु भलाई।।

तब कुल कमल बिपिन दुखदाई। सीता सीत निसा सम आई।।

सुनहु नाथ सीता बिनु दीन्हें। हित न तुम्हार संभु अज कीन्हें।।

भावार्थ

हनुमानजी द्वारा लंका दहन कर दिए जाने के बाद समस्त राक्षस भयभीत हो जाते हैं। वे आपस में विचार करते हैं कि जिस दूत (हनुमान) के बल का वर्णन भी नहीं किया जा सकता, यदि वह अकेले ही इतनी बड़ी हानि कर सकता है तो सेना आने पर क्या होगा!

मंदोदरी यह स्थिति देखकर अत्यंत व्याकुल हो जाती है। वह रावण से नीति-युक्त वाणी में कहती है कि –

“हे स्वामी! श्रीराम से वैर छोड़ दीजिए। जिनके दूत की यह शक्ति है, उनके सामने आप कैसे टिक सकते हैं? यदि आप अपना और अपने कुल का हित चाहते हैं तो सीता माता को लौटा दीजिए। सीता के बिना आपका और आपके वंश का कल्याण असंभव है।”

👉 विस्तृत विवेचन

1. लंका का भयभीत होना

हनुमानजी ने लंका जलाई, सब राक्षसों के मन में भय और संदेह उत्पन्न हो गया।

वे सोचने लगे – “जिसके दूत का बल अपार है, वह स्वयं प्रभु आएँगे तो हमारी रक्षा कौन करेगा?”

2. मंदोदरी की बुद्धिमत्ता

मंदोदरी अत्यंत धर्मनिष्ठ और दूरदर्शी थी।

उसने स्पष्ट कहा – “स्वामी! श्रीराम से शत्रुता मत कीजिए, क्योंकि उनके साथ देवता और महादेव (शंभु) तक हैं। यदि आप हित चाहते हैं तो सीता को लौटा दें।”

3. सीता का महत्व

मंदोदरी ने सीता को ‘कुल-कमल-विपिन दुखदाई’ कहा, अर्थात यदि सीता को कैद में रखा तो रावणकुल नाश को प्राप्त होगा।

सीता का वियोग रावणकुल के लिए अमंगल और विनाशकारी है।

4. नीति और धर्म का संदेश

इस प्रसंग में स्पष्ट है कि स्त्रियाँ भी समय आने पर नीति-युक्त और सत्य का मार्ग दिखा सकती हैं।

मंदोदरी ने धर्म और नीति का मार्ग दिखाकर अपने पति और कुल की रक्षा का प्रयास किया।

👉 सारांश

इस चौपाई में राक्षसों का भय, हनुमान के पराक्रम का प्रभाव, और मंदोदरी की नीति-पूर्ण बुद्धिमत्ता का वर्णन है। वह रावण को समझाती है कि राम से वैर छोड़कर सीता को लौटाना ही उसके और समस्त कुल के हित में है।


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