सुन्दर काण्ड दोहा (6)

 सुन्दर काण्ड दोहा 6 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:

दो0-तब हनुमंत कही सब राम कथा निज नाम।

सुनत जुगल तन पुलक मन मगन सुमिरि गुन ग्राम।।6।।

भावार्थ:

जब हनुमान जी ने स्वयं भगवान राम के नाम और राम कथा को अपने ही शब्दों में व्यक्त किया, तब विभीषण के शरीर में रोम-रोम तक आनंद की झंकार हुई। उनका मन पूरी तरह प्रसन्न और मग्न हो गया, और वे राम के गुणों का निरंतर स्मरण करने लगे।

विस्तृत विवेचन:

"तब हनुमंत कही सब राम कथा निज नाम": यहाँ हनुमान जी स्वयं अपने शब्दों में राम की कथा का वर्णन कर रहे हैं। 'निज नाम' का अर्थ है अपने नाम अर्थात अपनी भाषा या अपने अंदाज में। हनुमान जी का यह वर्णन भक्ति से ओतप्रोत और भावपूर्ण होता है।

"सुनत जुगल तन पुलक": 'जुगल' का अर्थ होता है जोड़ी या दो लोग, हनुमान और विभीषण, हनुमान जी की कथा सुन रहे थे। ये सुनते समय उनके शरीर में 'पुल्क' अर्थात कंपन या भावनाओं का संचार हो गया, जो आन्तरिक उल्लास, आनंद और श्रद्धा का संकेत है।

"मन मगन सुमिरि गुन ग्राम": उनका मन राम के गुणों और लीलाओं को याद करते हुए पूरी तरह मग्न हो गया। 'गुन ग्राम' का अर्थ होता है गुणों के विस्तार से स्मरण। इसका आशय है कि राम जी के दिव्य गुणों का स्मरण उनके मन में गहराई से स्थिर हो गया।

संक्षेप में:

यह दोहा भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत चित्र प्रस्तुत करता है, जहाँ हनुमान की रामकथा सुनने के बाद विभीषण भाव-भीज होकर श्रीराम के चमत्कारिक और आदर्श गुणों का स्मरण करते हैं। इससे विभीषण के मन में राम भक्ति और प्रेम का संचार होता है, जो उन्हें आध्यात्मिक उन्नति की ओर प्रेरित करता है। यह दोहा सुंदरकाण्ड के भक्तिमय और प्रभावशाली चरित्र को दर्शाता है।

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