सुन्दर काण्ड चौपाई (41-43)
सुन्दर काण्ड चौपाई 41-43 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:
चौपाई
प्रबिसि नगर कीजे सब काजा।
हृदयँ राखि कौसलपुर राजा।।
गरल सुधा रिपु करहिं मिताई।
गोपद सिंधु अनल सितलाई।।
गरुड़ सुमेरु रेनू सम ताही।
राम कृपा करि चितवा जाही।।
शब्दार्थ
प्रबिसि: प्रवेश करके
नगर: नगर (लंका)
कीजे सब काजा: सभी कार्य कीजिए
हृदयँ राखि कौसलपुर राजा: हृदय में अयोध्या के राजा (राम) को रखकर
गरल: विष
सुधा: अमृत
रिपु: शत्रु
मिताई: मित्रता
गोपद: गाय का खुर
सिंधु: समुद्र
अनल: अग्नि
सितलाई: शीतलता
गरुड़: विशाल पक्षी (गरुड़)
सुमेरु: महान पर्वत
रेनू: धूल
ताही: उसे
राम कृपा करि: श्रीराम की कृपा से
चितवा जाही: जिसे देख लेता है
भावार्थ
हनुमानजी को लंकिनी समझाती है कि,
"हे हनुमानजी जब भी कोई कार्य करना हो, तो पहले अपने हृदय में श्रीराम को बसाकर (उनका स्मरण करके) ही कार्य करना चाहिए। जब श्रीराम की कृपा दृष्टि हो जाती है, तो विष भी अमृत बन जाता है, शत्रु भी मित्र बन जाते हैं, गाय के खुर के बराबर समुद्र हो जाता है (अर्थात् कठिन कार्य भी सहज हो जाता है), अग्नि शीतल हो जाती है, और गरुड़ जैसे विशाल पर्वत भी धूल के समान हल्के हो जाते हैं।"
विस्तृत विवेचन
1. रामस्मरण की महिमा
हनुमानजी जब लंका में प्रवेश करने के लिए तैयार होते हैं, तब लंकिनी उन्हें समझाती है कि किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए भगवान श्रीराम का स्मरण आवश्यक है।
"हृदयँ राखि कौसलपुर राजा" — इसका अर्थ है कि जब हम अपने हृदय में भगवान राम को बसा लेते हैं, तब हर कठिनाई आसान हो जाती है।
2. रामकृपा से असंभव कार्य भी संभव
गरल सुधा रिपु करहिं मिताई — रामकृपा से विष अमृत बन जाता है, शत्रु मित्र बन जाते हैं।
गोपद सिंधु अनल सितलाई — समुद्र गाय के खुर के बराबर हो जाता है (अर्थात् कठिनाई तुच्छ हो जाती है), अग्नि शीतल हो जाती है।
गरुड़ सुमेरु रेनू सम ताही — गरुड़ और सुमेरु पर्वत भी धूल के समान हल्के हो जाते हैं।
इन उपमाओं के माध्यम से तुलसीदास जी यह समझाते हैं कि प्रभु की कृपा से संसार की सबसे बड़ी बाधा भी तुच्छ हो जाती है।
3. आध्यात्मिक संदेश
यह चौपाई केवल हनुमानजी के लिए ही नहीं, बल्कि प्रत्येक साधक के लिए मार्गदर्शन है।
जब भी जीवन में कोई कठिन कार्य आए, तो भगवान का स्मरण करके, उनकी कृपा पर विश्वास करके आगे बढ़ना चाहिए।
प्रभु की कृपा से असंभव भी संभव हो जाता है।
4. व्यावहारिक शिक्षा
आत्मविश्वास और श्रद्धा: जब व्यक्ति अपने आराध्य का स्मरण करता है, तो उसमें आत्मबल और साहस आ जाता है।
सकारात्मक दृष्टिकोण: कठिनाइयाँ भी आसान लगने लगती हैं।
मित्रता और शत्रुता: जीवन में शत्रु भी मित्र बन सकते हैं, यदि ईश्वर की कृपा हो।
निष्कर्ष
इस चौपाई का मूल संदेश है— प्रभु का स्मरण और उनकी कृपा से संसार की सबसे बड़ी बाधाएँ भी तुच्छ हो जाती हैं। हनुमान जी ने इसी विश्वास के साथ लंका में प्रवेश किया और असंभव को संभव कर दिखाया।
यह चौपाई हमें भी प्रेरित करती है कि जीवन के हर कार्य में भगवान का स्मरण और उनकी कृपा पर विश्वास रखकर आगे बढ़ें, तो सफलता निश्चित है।
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