सुन्दर काण्ड चौपाई (29-32)

 सुन्दर काण्ड चौपाई 29-32 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:

चौपाई

सैल बिसाल देखि एक आगें।

ता पर धाइ चढेउ भय त्यागें।।

उमा न कछु कपि कै अधिकाई।

प्रभु प्रताप जो कालहि खाई।।

गिरि पर चढि लंका तेहिं देखी।

कहि न जाइ अति दुर्ग बिसेषी।।

अति उतंग जलनिधि चहु पासा।

कनक कोट कर परम प्रकासा।।

यह चौपाई गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस के सुंदरकाण्ड से ली गई है। इसमें हनुमानजी के लंका पहुँचने और वहाँ की भव्यता, सुरक्षा और दुर्गमता का वर्णन है।

भावार्थ

हनुमानजी समुद्र पार करके लंका के समीप पहुँचते हैं। वहाँ उन्होंने एक विशाल पर्वत देखा। भय को त्यागकर वे उस पर्वत पर चढ़ गए। माता पार्वती (उमा) को शिवजी कहते हैं कि इसमें हनुमानजी की कोई विशेषता नहीं, यह सब श्रीराम के प्रताप का ही प्रभाव है, जिससे काल (मृत्यु) भी पराजित हो जाता है। पर्वत पर चढ़कर हनुमानजी ने लंका नगरी को देखा, जो अत्यंत दुर्गम थी। चारों ओर समुद्र था और सोने की बनी हुई उसकी प्राचीर (दीवारें) अत्यंत चमक रही थीं।

विस्तृत विवेचन

1. सैल बिसाल देखि एक आगें। ता पर धाइ चढेउ भय त्यागें।

हनुमानजी समुद्र पार करने के बाद लंका के निकट एक विशाल पर्वत देखते हैं। वे बिना किसी भय के उस पर्वत पर चढ़ जाते हैं ताकि वे लंका नगरी का ठीक से अवलोकन कर सकें। यह हनुमानजी के साहस, धैर्य और बुद्धिमत्ता का परिचायक है।

2. उमा न कछु कपि कै अधिकाई। प्रभु प्रताप जो कालहि खाई।

यहाँ भगवान शिव माता पार्वती (उमा) से कहते हैं कि इसमें हनुमानजी की अपनी कोई विशेषता या अहंकार नहीं है। यह सब श्रीराम के प्रताप का प्रभाव है, जिससे काल (मृत्यु) भी पराजित हो जाता है। अर्थात, हनुमानजी की शक्ति, साहस और सफलता का मूल कारण श्रीराम का आशीर्वाद और उनकी कृपा है।

3. गिरि पर चढि लंका तेहिं देखी। कहि न जाइ अति दुर्ग बिसेषी।

हनुमानजी पर्वत की ऊँचाई से लंका नगरी को देखते हैं। वे देखते हैं कि लंका अत्यंत दुर्गम और विशेष प्रकार से सुरक्षित है। उसकी सुरक्षा का वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता। यह लंका की भौगोलिक और स्थापत्यकला की महानता को दर्शाता है।

4. अति उतंग जलनिधि चहु पासा। कनक कोट कर परम प्रकासा।

लंका चारों ओर से समुद्र से घिरी हुई है और उसकी प्राचीर (दीवारें) सोने की बनी हुई हैं, जो अत्यंत चमक रही हैं। यह लंका की भव्यता, समृद्धि और उसकी सुरक्षा का परिचायक है। सोने की दीवारें उसकी समृद्धि और वैभव को दर्शाती हैं।

सारांश

इन चौपाइयों में हनुमानजी की निर्भीकता, श्रीराम के प्रताप का प्रभाव, लंका की दुर्गमता और भव्यता का अद्भुत चित्रण मिलता है। साथ ही यह भी संदेश मिलता है कि सच्चे भक्त की सफलता में उसकी अपनी योग्यता से अधिक प्रभु की कृपा और आशीर्वाद का महत्व होता है। लंका की भव्यता और सुरक्षा का वर्णन यह दर्शाता है कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली और सुरक्षित क्यों न हो, सच्चाई और भक्ति के आगे वह टिक नहीं सकती।

यह चौपाई सुंदरकाण्ड के उस प्रसंग को दर्शाती है, जहाँ हनुमानजी अपने साहस, विवेक और श्रीराम के प्रताप से लंका में प्रवेश करने की तैयारी करते हैं।


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