सुन्दर काण्ड चौपाई (22-23)

 सुन्दर काण्ड चौपाई 22-23 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:

चौपाई

निसिचरि एक सिंधु महुँ रहई। करि माया नभु के खग गहई।।

जीव जंतु जे गगन उड़ाहीं। जल बिलोकि तिन्ह कै परिछाहीं।।

यह चौपाई श्रीरामचरितमानस के सुंदरकाण्ड से ली गई है। आइए इसका भावार्थ और विस्तृत विवेचन करें।

भावार्थ

समुद्र में एक राक्षसी रहती थी, जो मायावी थी। वह आकाश में उड़ने वाले पक्षियों को पकड़ लेती थी। जो भी जीव-जंतु आकाश में उड़ते और समुद्र के ऊपर से जाते, वे जब समुद्र में अपनी छाया देखते, तो वह राक्षसी उन्हीं की छाया पकड़कर उन्हें निगल जाती थी।

विस्तृत विवेचन

1. संदर्भ

यह प्रसंग उस समय का है जब हनुमानजी समुद्र पार कर लंका जा रहे हैं। मार्ग में उन्हें कई बाधाएँ आती हैं। इन्हीं में से एक राक्षसी है, जो समुद्र में रहती है।

2. शब्दार्थ

निसिचरि: रात्रि में विचरण करने वाली, अर्थात राक्षसी।

सिंधु महुँ रहई: समुद्र में रहती थी।

करि माया: माया (जादू/छल) करके।

नभु के खग गहई: आकाश के पक्षियों को पकड़ लेती थी।

जीव जंतु: जीव-जन्तु, विशेषकर पक्षी।

गगन उड़ाहीं: आकाश में उड़ते हैं।

जल बिलोकि तिन्ह कै परिछाहीं: जल (समुद्र) में अपनी छाया देखकर।

परिछाहीं: छाया।

3. कथानक

हनुमानजी जब समुद्र पार कर रहे थे,  तो  एक राक्षसी थी जो अब समुद्र में बैठकर आकाश में उड़ने वाले जीवों की छाया देखकर उन्हें पकड़ लेती थी। यह दर्शाता है कि समुद्र पार करना कितना कठिन और खतरनाक था। 

4. आध्यात्मिक अर्थ

यह प्रसंग यह भी दर्शाता है कि जीवन में जब हम किसी बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं, तो मार्ग में अनेक बाधाएँ आती हैं। कभी-कभी ये बाधाएँ इतनी मायावी होती हैं कि हमें उनकी वास्तविकता का पता भी नहीं चलता। हनुमानजी की तरह हमें भी धैर्य, बुद्धि और साहस से इनका सामना करना चाहिए।

5. प्रेरणा

मायावी बाधाएँ: जीवन में कई बार समस्याएँ प्रत्यक्ष नहीं होतीं, वे छाया की तरह होती हैं—अर्थात अप्रत्यक्ष रूप से हमें प्रभावित करती हैं।

बुद्धि और विवेक: हनुमानजी ने राक्षसी के साथ अपनी शक्ति और चतुराई का प्रयोग किया, जिससे वे आगे बढ़ सके।

संकल्प और धैर्य: किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए संकल्प और धैर्य आवश्यक है।

निष्कर्ष

यह चौपाई हनुमानजी के साहस, बुद्धिमत्ता और मार्ग की कठिनाइयों को दर्शाती है। साथ ही, यह हमें सिखाती है कि जीवन में आने वाली मायावी और अप्रत्याशित बाधाओं का सामना विवेक और धैर्य से करना चाहिए।

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