सुन्दर काण्ड (दोहा 2)

 सुन्दर काण्ड दोहा 2 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:

दो0-राम काजु सबु करिहहु तुम्ह बल बुद्धि निधान।

आसिष देह गई सो हरषि चलेउ हनुमान।।2।।

यह दोहा श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड का दूसरा दोहा है। इसमें हनुमान जी के चरित्र और उनके कार्य के प्रति उनकी तत्परता का सुंदर चित्रण है।

भावार्थ

इस दोहे में कहा गया है कि—

हे हनुमान! तुम बल और बुद्धि के भंडार हो। तुम श्रीराम के सभी कार्य अवश्य ही करोगे। माता सुरसा ने तुम्हें आशीर्वाद दिया और हनुमान जी हर्षित होकर वहाँ से चल पड़े।

विस्तृत विवेचन

1. परिस्थिति का वर्णन

यह दोहा उस प्रसंग से संबंधित है जब सुरसा माता की परीक्षा में हनुमान जी सफल होते हैं और वह कहती है :-हनुमान! तुम बल और बुद्धि के भंडार हो। तुम श्रीराम के सभी कार्य अवश्य ही करोगे। माता सुरसा ने तुम्हें आशीर्वाद दिया और हनुमान जी हर्षित होकर वहाँ से चल पड़े।

2. हनुमान जी की विशेषताएँ

बल-बुद्धि निधान:

हनुमान जी के पास अपार बल (शक्ति) और बुद्धि (चतुराई) है। यही कारण है कि वे असंभव कार्य को भी संभव बना सकते हैं।

राम काजु सबु करिहहु:

श्रीराम के कार्यों को करना ही हनुमान जी का जीवन-धर्म है। वे अपने स्वार्थ या अभिमान के लिए नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम के कार्यों के लिए ही अपनी सारी शक्तियों का उपयोग करते हैं।

3. सुरसा माता का आशीर्वाद

माता सुरसा ने  हनुमान जी को आशीर्वाद दिया कि वे श्रीराम के सभी कार्यों को सफलतापूर्वक संपन्न करें। यह आशीर्वाद हनुमान जी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया।

4. हनुमान जी का उत्साह

आशीर्वाद प्राप्त कर हनुमान जी हर्षित (प्रसन्न) होकर वहाँ से चले गए। इससे यह स्पष्ट होता है कि जब किसी को सच्चे मन से आशीर्वाद और शुभकामनाएँ मिलती हैं, तो उसमें अद्भुत ऊर्जा और उत्साह आ जाता है।

5. संदेश

कर्तव्यनिष्ठा:

यह दोहा हमें अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान रहने की प्रेरणा देता है।

आशीर्वाद का महत्व:

बड़ों का आशीर्वाद और शुभकामनाएँ जीवन में सफलता के लिए बहुत आवश्यक हैं।

शक्ति और बुद्धि का सदुपयोग:

अपनी शक्ति और बुद्धि का उपयोग सदैव अच्छे कार्यों और दूसरों की सहायता में करना चाहिए।

निष्कर्ष

यह दोहा हनुमान जी की प्रभु-भक्ति, कर्तव्यपरायणता, शक्ति, बुद्धि और आशीर्वाद की महिमा का सुंदर चित्रण करता है। यह हमें भी अपने जीवन में सदैव अच्छे कार्य करने, बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त करने और अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है।

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