सुन्दर काण्ड (चौपाई 3)
सुन्दर काण्ड चौपाई 3 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:
चौपाई:
जब लगि आवौं सीतहि देखी। होइहि काजु मोहि हरष बिसेषी।।
शाब्दिक अर्थ
जब लगि आवौं सीतहि देखी।
— “जब तक मैं सीता माता को देखकर वापस आता हूं
होइहि काजु मोहि हरष बिसेषी।।
— “(जब मैं सीता माता को देख लूँगा) तभी मेरा काम पूरा होगा और मुझे विशेष आनंद होगा।”
भावार्थ
यह चौपाई हनुमान जी के मनोभावों को स्पष्ट करती है। हनुमान जी लंका में सीता माता को खोजने के लिए गए हैं। उनका एकमात्र लक्ष्य है—सीता माता को देखना और उनकी खबर राम जी तक पहुँचाना। यहाँ वे कहते हैं कि जब तक मैं सीता माता को नहीं देख लेता, तब तक मैं वापस नहीं जाऊँगा। सीता माता को देखने पर ही उनका काम पूरा होगा और उन्हें विशेष आनंद मिलेगा।
विस्तृत विवेचन
दृढ़ निश्चय और समर्पण
हनुमान जी के वचनों में उनकी दृढ़ता और समर्पण झलकता है। वे अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किसी भी प्रकार की बाधा से विचलित नहीं होते।
प्रेम और कर्तव्य का भाव
हनुमान जी को सीता माता को देखने से ही अपने कर्तव्य की पूर्ति का आनंद मिलता है। यहाँ प्रेम और कर्तव्य का अनूठा संगम है।
आत्मविश्वास
यह चौपाई हनुमान जी के आत्मविश्वास को भी दर्शाती है। वे अपनी शक्ति और बुद्धि पर भरोसा रखते हैं कि वे अवश्य सीता माता को खोज निकालेंगे।
राम-भक्ति की भावना
हनुमान जी का यह प्रयास राम भक्ति से प्रेरित है। उनका एकमात्र लक्ष्य भगवान राम की सेवा करना है।
सारांश
इस चौपाई में हनुमान जी के दृढ़ निश्चय, समर्पण, प्रेम, कर्तव्य और आत्मविश्वास की भावना प्रकट होती है। वे अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किसी भी प्रकार की बाधा से विचलित नहीं होते और सीता माता को देखने पर ही अपने कर्तव्य की पूर्ति मानते हैं।
यह चौपाई हमें अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण और दृढ़ता की प्रेरणा देती है।
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