सुन्दर काण्ड चौपाई (13-14)
सुन्दर काण्ड चौपाई 13-14 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:
राम काजु करि फिरि मैं आवौं। सीता कइ सुधि प्रभुहि सुनावौं।।
तब तव बदन पैठिहउँ आई। सत्य कहउँ मोहि जान दे माई।।
भावार्थ
यह चौपाई सुन्दर काण्ड का है। जब देवताओं ने हनुमान जी की बल- बुद्धि और सामर्थ्य की परीक्षा लेने के लिए सुरसा माता को भेजा और उन्होंने कहा कि आज देवताओं ने मुझे बहुत अच्छा भोजन दिया है। तब हनुमान जी ने सुरसा (जो सर्पों की माता है) से कहा:-
पहली पंक्ति:
"राम काजु करि फिरि मैं आवौं। सीता कइ सुधि प्रभुहि सुनावौं।"
अर्थ:
मैं (हनुमान) भगवान राम का कार्य पूरा करके वापस आऊँगा, और सीता जी का समाचार प्रभु श्रीराम को सुनाऊँगा।
दूसरी पंक्ति:
"तब तव बदन पैठिहउँ आई। सत्य कहउँ मोहि जान दे माई।"
अर्थ:
तब मैं (हनुमान) आपके मुख में प्रवेश कर जाऊँगा, (अर्थात आपके हृदय में आश्वस्त होकर) और सत्य कहूँगा, माता आप मुझे अपना जानकर आत्मीयता दें।
विस्तृत विवेचन
1. भक्ति और कर्तव्यबोध
हनुमान जी का यह वचन उनके श्रीराम के प्रति गहन भक्ति तथा कर्तव्यबोध को दर्शाता है। वे अपना सारा ध्यान प्रभु राम के कार्य को पूरा करने में लगाते हैं और सीता माता का समाचार लाना अपनी सफलता मानते हैं।
2. आत्मविश्वास और संकल्प
हनुमान जी को अपनी शक्ति पर पूरा विश्वास है। वे कहते हैं कि वे राम का कार्य पूरा करके ही लौटेंगे और प्रभु को सीता जी का समाचार सुनाएंगे। यह उनके दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास को दर्शाता है।
3. सत्यनिष्ठा और विनम्रता
दूसरी पंक्ति में हनुमान जी माता से कहते हैं कि वे उनके मुख (हृदय) में प्रवेश करेंगे, अर्थात उनकी आत्मा में विश्वास रखेंगे और सत्य कहेंगे। यह उनकी सत्यनिष्ठा और विनम्रता को प्रकट करता है।
4. भावनात्मक पक्ष
हनुमान जी माता से कहते हैं कि वे उन्हें अपना जानकर आत्मीयता दें। यह उनकी भक्ति में माता के प्रति आत्मीय भाव और आदर को दर्शाता है।
निष्कर्ष
इस चौपाई में हनुमान जी का भगवान राम के प्रति अटूट भक्ति, कर्तव्यबोध, आत्मविश्वास, सत्यनिष्ठा और विनम्रता स्पष्ट रूप से झलकती है। यह हनुमान जी के चरित्र की महानता और उनके आदर्श व्यक्तित्व को प्रकट करती है।
Comments
Post a Comment