सुन्दर काण्ड (चौपाई 12)

 सुन्दर काण्ड चौपाई 12 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:

आजु सुरन्ह मोहि दीन्ह अहारा। सुनत बचन कह पवनकुमारा॥

यह चौपाई श्रीरामचरितमानस के सुन्दरकाण्ड में आती है, जहाँ हनुमान जी लंका की ओर प्रस्थान करते समय सुरसा नामक सर्पों की माता से मिलते हैं।


भावार्थ

"आजु सुरन्ह मोहि दीन्ह अहारा। सुनत बचन कह पवनकुमारा॥"

इसका अर्थ है—

"आज देवताओं ने मुझे भोजन (अहारा) दिया है।" (यह वाक्य सुरसा कहती है।)

"सुनत बचन कह पवनकुमारा॥"

अर्थात, यह वचन सुनकर पवनकुमार (हनुमान जी) ने कहा

विस्तृत विवेचन

देवताओं द्वारा सुरसा को भेजना:

जब हनुमान जी लंका जाने के लिए उड़ान भरते हैं, तब देवताओं द्वारा सुरसा को उनकी बल-बुद्धि की परीक्षा लेने के लिए भेजा जाता है।

सुरसा का वचन:

सुरसा कहती हैं—"आज देवताओं ने मुझे भोजन दिया है।"

यहाँ भोजन का अर्थ है कि देवताओं ने उसे हनुमान को रोकने का दायित्व सौंपा है।

आध्यात्मिक संदेश:

यह प्रसंग हनुमान जी की निष्ठा, वचनबद्धता और बुद्धिमत्ता को दर्शाता है। वे अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखते हैं और विघ्नों के सामने भी विचलित नहीं होते।

सारांश

यह चौपाई हनुमान जी के चरित्र की दृढ़ता, विनम्रता और श्रीराम के प्रति समर्पण को प्रकट करती है। सुरसा के माध्यम से देवताओं द्वारा उनकी परीक्षा ली जाती है, लेकिन हनुमान जी अपने कर्तव्य से विमुख नहीं होते और सहजता से विघ्नों को पार करते हैं

Comments

Popular posts from this blog

सुन्दर काण्ड (चौपाई 15-16)

सुन्दर काण्ड चौपाई ( 33-40)

सुन्दर काण्ड चौपाई (195-204)